वह गंगा पुत्र थे , अब गंगा की धारा हैं -
जिस धारा में विद्युत् तरंग है, निर्मलता है, लक्ष्य है
जो दे रहा आशीष मुझको, कर रहा प्रेरित मन कों।
मेरे बच्चों-
दिग्भ्रमित न होना, कभी निर्दिष्ट दिशा में ठोकर जो आये
धैर्य को अवलंब बना शान्ति को संबल बना
ह्रदय व्यथा को आत्मसात कर मौन रह अपनी डगर पर
प्रगति के पथ पर अग्रसर रहो,
प्रेरणा दीप बन मार्गदर्शक बने रहो
ये मेरा आशीष है..ये मेरा आशीष है...
हे तात ! करूँ किस भांति नमन
मेरा हर क्षण हर पल रहे तेरे आशीष में निमग्न
तेरे आशीष में निमग्न। तेरे आशीष में निमग्न ।
तुझको नमन । तुझको नमन ।
--चुन्नू
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